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Friday, December 15, 2017

A power of Sankalpa

                            संकल्प    

मै आज आप लोगो से संकल्प के बारे मे चर्चा करने जा रहा हू,बहुत कम लोग जानते है कि उत्साहयक्त  निर्णय में मन में एक ही निर्णय को बार बार दोहराने से और अपने निर्णय को कार्य रुप में परिणत  करने में कितनी शक्ति खर्च होती है।बड़े-बड़े कार्य तभी पूरे होते हैं जब उस कार्य को करने का बीड़ा उठाने वाले व्यक्ति को विश्वास होता है ,कि वह जान की बाजी लगाकर भी उस कार्य को पूरा करेगा जो व्यक्ति रचनात्मक निश्चय अपने मन में बार बार दोहराता है,तो जो अटूट विश्वास और शक्ति जागृत होती है उससे वह निर्णय परिवर्तित नहीं हो पाता है इस विश्वास के कारण उस व्यक्ति में कार्य पूर्ण करने की योग्यता पैदा हो जाती है ।यह आत्मविश्वास जितना बड़ा होगा जितना कठोर होगा उतनी ही सफलता प्राप्त होगी निर्णय पर अटल विश्वास की कितनी मात्रा होगी सफलता भी उतनी ही मात्रा में प्राप्त होगी।
कुछ लोग कहा करते हैं। यदि ईश्वर ने चाहा और उसकी इच्छा हुई यदि भाग्य में हुआ तो वह यह नहीं समझते कि यदि किंतु परंतु शब्द ही मनुष्य की इच्छा शक्ति को कमजोर बना देते हैं यदि लगाकर आप स्वयं अपनी इच्छाशक्ति निसंदेह प्रकट करने लगते हैं किंतु परंतु तो एक बहाना मात्र है अपने आप को धोखा देना है अपने आपको ठगना है भगवान तो सदा यही चाहते हैं कि मनुष्य बड़े बड़े काम करें ऐसी स्थिति में हमे यदि किंतु परंतु का प्रयोग नहीं करना चाहिए यदि से आप में काम करने की जो महान सकती है वह कम होती है उसकी धार मन्द पङती है विघ्नो को पार करने उन्हें काट फेकने वाली तलवार कुंठित हो जाती है यदि के विपरीत यदि आप निश्चित रूप से अवश्य शब्दों का प्रयोग करें तो आपकी रचनात्मक और कार्य करने वाली शक्ति अधिक प्रबल होगी।
22 सितंबर 1862 को जिस समय अब्राहम लिंकन ने स्वाधीनता का घोषणा पत्र तैयार किया था उस समय उसने अपनी डायरी में प्रतिज्ञा लिखी थी मैं ईश्वर के सम्मुख यह प्रतिज्ञा करता हूं,कि स्वाधीनता की घोषणा कर के ही रहूंगा और उसने स्वाधीनता की घोषणा कर दी ऐसा व्यक्ति बहुत कठिनता से ही मिलेगा जो दृढ़ विश्वास के साथ कह सके जो कार्य मुझे करना है मैं वह करूंगा जो मैं कर सकता हूं करूंगा जो कुछ मुझे करना चाहिए और जिसे मैं कर सकता हूं वही मुझे करना चाहिए ईश्वर की कृपा से अवश्य करूंगा क्योंकि मैंने ईश्वर के सम्मुख र्पण किया।कहा भी गया है जब मानव जोर लगाता है पत्थर पानी बन जाता है।

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